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बृहत्संहिता • अध्याय 71 • श्लोक 5
सुहद्युतिद्ध मित्रभे तदप्रभेऽम्बर क्षयः । जलप्लुतिश्च नैति रुजो जलाधिदेवते ॥
ज्येष्ठा में जल का क्षय, मूल में अल में दूबने का भय पूर्वाषाढा में रोग, उत्तराषाढा में मिष्ठान का लाभ,
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