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बृहत्संहिता • अध्याय 71 • श्लोक 4
करेण कर्मसिद्धयः शुभागमस्तु चित्रया। शुभं च भोज्यमानिले द्विदैवते जनप्रियः ॥
उत्तरफाल्गुनों में धन का लाभ, हस्त में कों की गिद्ध, चित्र में शुभ की प्राप्ति, स्वाती में उत्तम भोजन का लाभ, विशाखा में जनरों का प्रिय अनुराधा में मित्रों का समागम,
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