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बृहत्संहिता • अध्याय 71 • श्लोक 2
मृगे तु मूषकाद्भयं व्यसुत्वमेव शाङ्करे पुनर्वसौ शुभागमस्तप्रभे धनैर्युतिः ॥
मृगशिरा में यत्र को चूरे का भय, आर्दा में मृत्यु, पुनर्वसु में शुभ की प्राप्ति, पुष्य में धन का लाभ, आश्लेश में बखनाश
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