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बृहत्संहिता • अध्याय 71 • श्लोक 13
छत्रध्वजस्वस्तिकवर्धमान श्रीवृक्षकुम्भाम्युजतोरणाद्यैः छेदाकृतिनैर्ऋतभागगाऽपि पुंसां विधत्ते नचिरेण लक्ष्मीम् ॥
यदि राक्षसों के भाग में भी छत्र, ध्वज, स्वस्तिक, वर्धमान (चिह्नविशेष), बिल्व- पृक्ष, कलश, कमल, तोरण आदि (सुव, कुण्ड, भृङ्गार, हाथी और घोड़े) के समान छेद आदि का आकार हो तो बहुत शीघ्र लक्ष्मी का लाभ कराता है।
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