यदि राक्षसों के भाग में स्याही लग जाय तो रोग या मृत्यु, मनुष्यों के भाग में
पुत्रजन्म और तेज का लाभ, देवताओं के भाग में भोग की वृद्धि तथा समस्त भागों के
प्रान्त में स्याही आदि लग जाय तो अनिष्ट फल प्राप्त होता है; ऐसा मुनियों द्वारा कहा
गया है।
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