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बृहत्संहिता • अध्याय 71 • श्लोक 10
लिप्ते मषीगोमयकर्दमाद्यैश्छिन्ने प्रदग्धे स्फुटिते च विन्द्यात् । पुष्टं नवेऽल्पाल्पतरं च भुक्ते पापं शुभं चाधिकमुत्तरीये ॥
यदि नवीन वस्त्र स्याही, गोबर, कीचड़ आदि से लिप्त हो जाय, जल जाय या फट जाय तो सम्पूर्ण अशुभ या शुभ फल जानना चाहिये। यदि मध्यम वत्र हो तो घोड़ा और बिल्कुल पुराना वत्र हो तो बहुत घोड़ा अशुभ या शुभ फल जानना चाहिये; किन्तु ओड़ने के वत्र हों तो अधिक अशुभ या शुभ फल होता है।
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