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बृहत्संहिता • अध्याय 71 • श्लोक 1
प्रभूतवस्त्रदाश्विनी भरण्यचापहारिणी । प्रदह्यतेऽग्निदैवते प्रजेश्वरेऽ बंसिद्धयः ॥
यदि अश्विनी नक्षत्र में नवीन व धारण करे तो बहुत पत्र का लाभ, भरणी में यतों की हानि, कृतिका में अग्नि सेव का जलन, रोहिणों में धन प्राप्ति
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