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बृहत्संहिता • अध्याय 70 • श्लोक 9
कर्णयुग्ममपि युक्तमांसलं शस्यते मृदु समाहित समयम् । स्निग्धनीलमृदुकुचितैकजा पूर्वजाः सुखकराः समं शिरः ॥
ती के अल्प मांसयुत, कोमल, समान और संलग्न दोनों कान शुभ होते हैं। स्निग्ध, अतिकृष्ण, कोमल, कुटिल और एक रोमकूप में एक रोम सुख देने वाले होते है तथा समान (न नीचा, न ऊँचा शिर शुभ होता है।
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