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बृहत्संहिता • अध्याय 70 • श्लोक 7
दाक्षिण्ययुक्तमशठं परपुष्टहंस- वल्गु प्रभाषितमदीनमनल्पसौख्यम् । नासा समा समपुटा रुचिरा प्रशस्ता नीलनीरजदलद्युतिहारिणी च ॥
सरस, शठता से रहित, कोकिल या हंस के समान मधुर और दीनतारहित स्त्री का वचन अधिक सुखद होता है। समान, समान पुटों से युत और सुन्दर स्त्री की नासिका प्रशस्त होती है तथा नील कमल की कान्ति को हरण करने वाली स्त्री को दृष्टि शुभ
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