मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 70 • श्लोक 5
मध्यं स्त्रियास्त्रिवलिनाथमरोमशं च वृत्ती घनावविषमौ कठिनावुरस्यौ । रोमप्रवर्जितमुरो मृदु चाङ्गनानां प्रीवा च कम्बुनिचितार्थसुखानि दत्ते ॥
जिस ती का मध्यभाग त्रिवलि से युत और रोमरहित हो, गोल, पुष्ट, समान और कठोर दोनों स्तन हों, रोमरहित और कोमल छाती हो तथा शङ्कु के समान तीन रेखाओं से युत कण्ठ हो, वह धन और सुख प्रदान करती है ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें