उदरं कथयन्ति पञ्चमं हृदयं षष्ठमतस्तनान्वितम् । अथ सप्तममंसजत्रुणी कथयन्त्यष्टममोष्ठकन्यरे ॥ नेत्र नाँ भाग तथा ललाटसहित सिर दशाँ भाग होता है।
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