पादौ सगुल्फौ प्रथमं प्रदिष्टौ जसे द्वितीयं तु सजानुचक्रे । मेट्रोरुमुष्कं च ततस्तृतीयं नाभिः कटिश्चैव चतुर्थमाहुः ॥
अब कालिक शुभाशुभ फल-ज्ञान के लिये शरीर के दश भाग कहते हैं। जैसे- गुल्फसहित पाँव पहला भाग; जानुचक्रसहित जंघा दूसरा भाग; लिंग, ऊरु और अण्डकोश तीसरा भाग; नाभि और कमर चौथा भाग
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