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बृहत्संहिता • अध्याय 70 • श्लोक 23
या तूत्तरोष्ठेन समुन्नतेन रूक्षायकेशी कलहप्रिया सा। प्रायो विरूपासु भवन्ति दोषा यत्राकृतिस्तत्र गुणा वसन्ति ॥
जिस खो के ऊपर का ओठ ऊँचा हो या केशों के अग्र भाग रूखे हों, यह कलह- प्रिया होती है। अधिकतर कुरूपा खियों में दोष और सुन्दरी में गुण होते हैं।
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