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बृहत्संहिता • अध्याय 70 • श्लोक 20
प्रविलम्बिनि देवरं ललाटे ग्रशुरं हन्युदरे स्किजोः पतिं च । अतिरोमचयान्वितोत्तरोष्ठी न शुभा भर्तुरतीव या च दीर्घा ॥
जिस स्त्री का ललाट लम्बा हो यह अपने देवर का, उदर लम्बा हो वह अपने बसुर का और स्फिक् (कुल्ला कटिप्रोच) लम्बा हो यह अपने पति का वध करती है तथा जिसके ऊपरी ओठ में अधिक रोम हों और जो बहुत लम्बी हो, यह पति के लिए शुभदायक नहीं होती है।
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