उड्छाभ्यां पिण्डिकाभ्यां शिराले शुष्के जसे लोमशे चातिमांसे । वामावर्त निम्नमल्पं च गुह्यं कुम्भाकारं चोदरं दुःखितानाम् ॥
ऊपर को खिंची हुई पिण्डिका (जंघा के पश्चिम भाग) वाली, नाड़ियों से व्याप्त,
सूखी, रोमों से युत या अधिक पुष्ट जंघा, वामावर्त रोमों से युत, निम्न और छोटी भग तथा घड़े के समान पेट दुःख भोगने वाली खियों की होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।