कनिष्ठिका वा तदनन्तरा वा महीं न यस्यः स्पृशति खियाः स्यात् । गताथवाऽङ्गुष्ठमतीत्य प्रदेशिनी सा यस्याः कुलटाऽतिपापा ॥
जिस स्त्री के पाँव को कनिष्ठिका या अनामिका भूमि को स्पर्श न करे, अँगूठे से लम्बी तर्जनी हो, वह व्यभिचारिणी और अति पापिनी होती है।
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