अंगूठे की मूल में सन्तान की रेखा होती है। उनमें जितनी बड़ी रेखा हो, उतने पुत्र और जितनी छोटी रेखा हो, उतनी कन्यायें होती हैं। साथ ही मध्य में विना टूटी हुई रेखा दीर्घायु वाले सन्तान कों और टूटी हुई रेखा अल्पायु वाले सन्तान की होती है ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।