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बृहत्संहिता • अध्याय 70 • श्लोक 14
अङ्गुष्ठमूले प्रसवस्य रेखाः पुत्रा बृहत्यः प्रमदास्तु तन्ख्यः । अच्छिन्नमध्या बृहदायुषस्ताः स्वल्पायुषां छिन्नलपुप्रमाणाः ॥
अंगूठे की मूल में सन्तान की रेखा होती है। उनमें जितनी बड़ी रेखा हो, उतने पुत्र और जितनी छोटी रेखा हो, उतनी कन्यायें होती हैं। साथ ही मध्य में विना टूटी हुई रेखा दीर्घायु वाले सन्तान कों और टूटी हुई रेखा अल्पायु वाले सन्तान की होती है ।
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