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बृहत्संहिता • अध्याय 70 • श्लोक 13
कनिष्ठिकामूलभवा गता या प्रदेशिनीमध्यमिकान्तरालम् । करोति रेखा परमायुषः सा प्रमाणमूना तु तदूनमायुः ॥
कनिष्ठिका के मूल से प्रदेशिनी और मध्यमा के मध्य में गई हुई पूरी रेखा हो तो परमायु और छोटी हो तो परमायु से अल्प आयु प्रदान करने वाली होती है।
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