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बृहत्संहिता • अध्याय 70 • श्लोक 11
निगूढमणिबन्धनौ करी तरुणपद्यगौपमौ नृपतियोषितस्तनुविकृष्टपर्वाङ्गुली। न निम्नमति नोव्रतं करतलं सुरेखान्थितं करोत्यविधवां चिरं सुतसुखार्थसम्भोगिनीम् ॥
रानी के हाथ नवीन कमलगर्भ के समान पतले और लम्बे पर्षों वाली अंगुलियों में युत और छिपे हुये मणिबन्ध वाले होते हैं। साथ ही नीचा न ऊँचा और उत्तम रेखाओं से युत करतल वाली स्त्री अविधवा पुत्रसुख और धन एवं सम्भोगसुख से समन्ति होती है।
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