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बृहत्संहिता • अध्याय 70 • श्लोक 10
भृङ्गारासनवाजिकुञ्जररथश्रीवृक्षयूपेषुभि- र्मालाकुण्डलचामराङ्कुशयवैः मत्स्यस्वस्तिकवेदिकाव्यजनकैः शैलैर्ध्वजैस्तोरणैः । शङ्खातपत्राम्बुजैः पादे पाणितलेऽथवा युवतयो गच्छन्ति राज्ञीपदम् ॥
जिस त्रो के पादतल या पाणितल में भृङ्गार (झारी), आसन, पोड़ा, हाथी, रथ, बिल्ववृक्ष, यज्ञस्तम्भ, शर, माला, कुण्डल, चामर, अंकुश, जौ, पर्वत, ध्वज, तोरण, मत्स्य, स्वस्तिक, यज्ञवेदी, पंखा, शंख, छत्र और कमल के समान रेखायें हों, वह रानी होती है।
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