मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 69 • श्लोक 8
यः सात्त्विकस्तस्य दया स्थिरत्वं सत्त्वार्जवं ब्राह्मणदेवभक्तिः । रजोऽधिकः काव्यकलाक्रतुस्त्रीसंसक्तचितः पुरुषोऽतिशूरः ॥
सात्त्विक पुरुषों को दया, स्थिरता, प्राणियों में सरलता और देवता में भक्ति होती है। रजोगुण वाला मनुष्य काव्य, कला, यज्ञ और खो में आसक्त तथा अतिशूर होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें