षण्णवतिरङ्गुलानां व्यायामो दीर्घता च हंसस्य। शशरुचक भद्रमालव्यसंज्ञितारूयङ्घलविवृङ्ख्या ॥
९६ अंगुल ऊँचाई और ९६ अंगुल व्यायाम (दोनों पुजा फैलाकर कर चौड़ाई)
हंस का होता है। इसमें तीन-तीन अंगुल बढ़ाने से क्रम से शश, रुचक, भद्र और मालव्य पुरुष की ऊँचाई और व्यायाम होता है।
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