मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 69 • श्लोक 6
सङ्कीर्णाः स्युर्न नृपा दशासु तेषां भवन्ति सुखभाजः । रिपुगृहनीचोच्चच्युतसत्पापनिरीक्षणैर्भेदाः ॥
सङ्कीर्ण लक्षण वाले मनुष्य राजा नहीं; किन्तु भौम आदि ग्रहों की दशा में सुखी होते हैं। शत्रुगृह, नीच, उच्च-इन स्थानों से चलित शुभ और पापग्रहों की दृष्टि से भेद होते हैं। उन भेदों से मनुष्य में सङ्कीर्णता दोष होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें