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बृहत्संहिता • अध्याय 69 • श्लोक 5
भौमात् सत्त्वं गुरुता बुधात् सुरेज्यात् स्वरः सितात् स्नेहः । वर्णः सौरादेषां गुणदोषैः साध्वसाधुत्वम् ॥
मंगल से सत्त्व, बुध से गुरुता, बृहस्पति से स्वर, शुक्र से स्नेह और शनि से कान्ति होती है। यदि मंगल आदि ग्रह बली हों तो पुरुष सत्त्व आदि गुणों से युत और निर्बल हों तो सत्त्व आदि गुणों से रहित होता है।
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