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बृहत्संहिता • अध्याय 69 • श्लोक 39
वृद्धाकारः खरपरुषमूर्धजश्च शत्रुनाशने द्विजदेवयज्ञयोगप्रसक्तधीः स्त्रीजितो कुशलः । मतिमान् ॥
वेताल (मरे हुये को मन्त्र द्वारा उठाने को वेताल कहते हैं) आदि विद्याओं में सक्त, वृद्ध के समान शरीर वाला, कठोर और रूखे केश वाला, शत्रु को मारने में कुशल, ब्राह्मण, देवता, यज्ञ और योग में आसक्त बुद्धि वाला, खोजित एवं बुद्धिमान् होता है।
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