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बृहत्संहिता • अध्याय 69 • श्लोक 34
मालव्यसेवी तु जघन्यनामा खण्डेन्दुतुल्यश्रवणः सुसन्धिः । शुक्रेण सारः पिशुनः कविश्च रूक्षच्छविः स्थूलकराष्ठ्ठलीकः ॥
जघन्य पुरुष मालव्य राजा का सेवक, अर्थबन्द्र के समान कान वाला, सुन्दर अङ्गसन्धि वाला, शुक्रसार, पिशुन (सूचक), पण्डित, रूखी शरीरकान्ति वाला और मोटी हस्ताङ्गुलि याला होता है।
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