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बृहत्संहिता • अध्याय 69 • श्लोक 33
सम्पूर्णाङ्गो वामनी भग्नपृष्ठः किश्शिच्चोरूमध्यकक्ष्यान्तरेषु । ख्यातो राज्ञां होष भद्रानुजीवी स्फीतो राजा वासुदेवस्य भक्तः ॥
वामनक पुरुष सम्पूर्ण अवयवों में युत, टूटी हुई पीठ याला, अविकसित करु, मध्य भाग और कक्ष्यान्तर वाला, प्रसिद्ध राजाओं के बीच में भद्र राजा का अनुजीवी, धनो, स्फोत, राजा तथा विष्णु का भक्त होता है।
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