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बृहत्संहिता • अध्याय 69 • श्लोक 32
पश्चापरे वामनको जघन्यः कुब्जोऽथवा मण्डलकोऽथ साची । पूर्वोक्त भूपानुचरा भवन्ति सङ्कीर्णसंज्ञः शृणु लक्षणैस्तान् ॥
पूर्वोक्त पाँच महापुरुषों के अतिरिक्त उनके अनुचररूप संकीर्ण संज्ञक वामनक, जघन्य, कुब्ज, मण्डलक, माची- ये पाँच पुरुष होते हैं। अब इनके लक्षणों को कहता हूँ, उसका श्रवण करो।
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