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बृहत्संहिता • अध्याय 69 • श्लोक 31
मन्त्राभिचारकुशलः कृशजानुजङ्गो मुक्त्वा । विन्ध्यं ससह्यगिरिमुज्जयिनों च सम्प्राप्य सप्ततिसमा रुचको नरेन्द्रः शस्त्रेण मृत्युमुपयात्यथवाऽनलेन ॥
रुचक पुरुष मन्त्र और अभिचार (मारण, मोहन, वशीकरण, उच्चाटन और विद्वेषण) में कुशल तथा कुशं जानु और जंघा वाला होता है। यह विन्ध्याचल, सह्याचल और उज्जयिनी में राज्य का भोग कर सत्तर वर्ष की आयु में शस्त्र या अग्नि से मृत्यु को प्राप्त करता है।
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