प्रात्यन्तिको माण्डलिकोऽ थवायं स्फिक्स्रावशूलाभिभवार्तमूर्तिः । एवं शशः सप्ततिहायनोऽयं वैवस्वतस्यालयमभ्युपैति ॥
शत पुरुष म्लेच्छ देश का माण्डलिक या राजा होता है तथा कुल्हे के टूटने आदि के कारण होने वाली पीड़ा से पीडित शरीर वाला होता है। इस तरह सत्तर वर्ष की आयु में वह यम के आलय में पृप्ता है अर्थात् मृत्यु को प्राप्त कराता है।
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