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बृहत्संहिता • अध्याय 69 • श्लोक 22
दीर्घोऽङ्गुलानां शतमष्टहीनं साशङ्कचेष्टः पररन्ध्रविच्च । सारोऽस्य मज्जा निघृतप्रचारः शशो ह्यतो नातिगुरुः प्रदिष्टः ॥
शश पुरुष बानबे अंगुल ऊँचा, सब कार्यों में शङ्कायुत, परछिद्रान्वेषी, मज्जासार, स्थिर गति और अधिक स्थूलता से रहित होता है।
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