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बृहत्संहिता • अध्याय 69 • श्लोक 21
ईषद्दन्तुरकस्तनुद्विजनखः कोशेक्षणः शीघ्रगो विद्याधातुवणिक्क्रियासु निरतः सम्पूर्णगण्डः शठः । सेनानीः प्रियमैथुनः परजनस्त्रीसक्तचित्तश्चलः शूरो मातृहितो वनाचलनदीदुर्गेषु सक्तः शशः ॥
कुछ ऊँचे दाँत वाला, छोटे दाँत और नख वाला, पुष्ट नेत्रकोश वाला, शीघ्रगामी, विद्या और धातुओं के व्यापारक्रिया में आसक्त, पुष्ट कपोल वाला, शठ, सेनापति, मैयुनप्रिय, परती में आसक्त, शूर, माता का भक्त तथा वन, पर्वत, नदी और दुगों में आसक्त शश पुरुष होता है।
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