हलमुशलगदासिशङ्खचक्र- द्विपमकराब्जर थाङ्किताश्प्रिहस्तः
विभवमपि जनोऽस्य बोभुजीति क्षमति हि न स्वजनं स्वतन्त्रबुद्धिः ॥
भद्र पुरुष के हाथ में हल, मूसल, गदा, खड्ग, शंख, चक्र, हाथी, मकर, कमल और रथ के समान रेखा होती है। इसकी सम्पत्ति को अन्य मनुष्य भी खूब भोगते हैं तथा यह बन्धुओं के लिये क्षमारहित और स्वतन्त्र बुद्धि वाला होता है।
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