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बृहत्संहिता • अध्याय 69 • श्लोक 16
प्राज्ञो वपुष्मान् सुललाटशङ्खः कलास्वभिज्ञो धृतिमान् सुकुक्षिः । सरोजगर्भद्युतिपाणिपादो योगी सुनासः समसंहतभूः ॥
मुन्दर तताट और शंख वाला, कलाओं को जानने वाला, धीर, सुन्दर पेट बाला, कमलगर्भ से समान हाथ और पाँव वाला, योगी, सुन्दर नासिका वाला तथा समान और मिले हुये भुजाओं से युत भद्र पुरुष होता है ।
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