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बृहत्संहिता • अध्याय 69 • श्लोक 15
त्वक्शुक्रसारः पृथुपीनवक्षाः सत्त्वाधिको व्याप्रमुखः स्थिरच । क्षमान्वितो धर्मपरः कृतज्ञो गजेन्द्रगामी बहुशास्त्रवेत्ता ॥
सुन्दर त्वचा से युत, बहुत गाढ़े वीर्य वाला, विस्तीर्ण और पुष्ट छाती वाला, अधिक सत्त्व गुण वाला, बाप के समान मुख वाला, स्थिर स्वभाव वाला, शान्तिशील, धर्मात्मा, कृतज्ञ, हाथी के समान गति वाला, बहुत शाखों का ज्ञाता,
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