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बृहत्संहिता • अध्याय 69 • श्लोक 14
उपचितसमवृत्तलम्बबाहु र्भुजयुगलप्रमितः समुच्छ्रयोऽस्य । मृदुतनुघनरोमनद्धगण्डो भवति नरः खलु लक्षणेन भद्रः ॥
भद्र पुरुष पुष्ट, बराबर, गोल और लम्बे बाहु वाला, भुजाओं को फैलाने से जितनी चौड़ाई हो, उतनी ऊँचाई वाला तथा कोमल, सूक्ष्म और घने रोमों से युत कपोल वाला होता है।
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