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बृहत्संहिता • अध्याय 69 • श्लोक 11
पश्चाष्टौ चोर्ध्वमास्यं श्रुतिविवरमपि त्र्यङ्गुलोनं च तिर्यग् दीप्ताक्षं सत्कपोलं समसितदशनं नातिमांसाघरोष्ठम् ॥
ठोड़ी से कान के छिद्र तक तिरछी दश अंगुल ऊँचाई वाला, दीप्त मुख और नेत्र वाला, सुन्दर कपोल वाला, समान और सफेद दाँत वाला तथा पतले अघर वाला होता है।
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