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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 96
ताल्वोष्ठदन्तपालीजिह्वानेत्रान्तपायुकरचरणैः रक्ते तु रक्तसारा बहुसुखवनितार्थपुत्रयुताः ॥
जिसके तालु, ओंठ, दाँत, मांस, जीभ, नेत्र के अन्तभाग, गुदा, हाथ, पाँव-ये सभी लाल हों, वे रुधिरसार वाले मनुष्य होते हैं। रुधिरसार वाले पुरुष बहुत सुख, ली, घन और पुत्रों से युत होते हैं।
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