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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 95
सप्त भवन्ति च सारा मेदोमज्जात्वगस्थिशुक्राणि । रुधिरं मांसं चेति प्राणभृतां तत्समासफलम् ॥
शरीर में मेद (हड्डियों के अन्तर्गत स्नेह भाग), मज्जा (खोपड़ी के मध्य का स्नेह भाग), चमड़ा, हड्डी, वीर्य, रुधिर, मांस-ये सात सार होते हैं। अब यहाँ संक्षेप से इनके फल कहते हैं।
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