मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 93
सूर्याब्जनाभपुरुहूतयमोडुपानां तुल्यास्तु लक्षणफलैरिति तत्समासः ॥
क्रम से भूमि, जल, अग्नि, वायु और आकाश की छाया मैंने कही है। कोई-कोई मुनि दश छाया कहते हैं। जैसे पूर्वोक्त भूमि आदि की पाँच छाया और सूर्य, विष्णु, इन्द्र, यम, चन्द्र-इन पाँचों की पाँच छाया, इस प्रकार दश छाया कहते हैं; किन्तु सूर्य की छाया आदि पाँच छायाओं का लक्षण और फल भी भूमि आदि के समान ही हैं। अतः मैंने दश छाया का संक्षेप करके पाँच ही छाया कही है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें