मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 92
मलिनपरुषकृष्णा जनयति पापगन्धानिलोत्था वधबन्यव्याध्यनर्थार्थनाशान् । स्फटिकसदृशरूपा भाग्ययुक्तात्युदारा निधिरिव गगनोत्या श्रेयसां स्वच्छवर्णा ॥
वायु की छाया मलिन, रूखी, काली और दुर्गन्धयुत होती है। यह छाया वध, बन्धन, रोग, लाभ में बाधा औन धन का नाश करती है। आकाश की छाया स्फटिक के समान कान्ति काली होती है। यह छाया भाग्ययुत, अति उदार, शुभ कार्यों की निधि के समान और स्वच्छ वर्ण वाली होती है। ३ ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें