वायु की छाया मलिन, रूखी, काली और दुर्गन्धयुत होती है। यह छाया वध, बन्धन, रोग, लाभ में बाधा औन धन का नाश करती है। आकाश की छाया स्फटिक के समान कान्ति काली होती है। यह छाया भाग्ययुत, अति उदार, शुभ कार्यों की निधि के समान और स्वच्छ वर्ण वाली होती है। ३ ।
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