अग्नि की छाया क्रोधशीला, अयुष्या (किसी से तिरस्कार को नहीं पाने वाली ),
कमल, अग्नि और सुवर्ण के समान कान्ति वाली तथा तेज, पराक्रम और प्रताप से युत
होती है। अग्नि की छाया प्राणियों की जय के लिये होती है तथा अति शीघ्र ही अभीष्ट
अर्थ की सिद्धि देने वाली होती है।
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