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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 90
स्निग्धा सिताच्छहरिता नयनाभिरामा सौभाग्यमार्दवसुखाभ्युदयान् सर्वार्थसिद्धिजननी करोति । जननीव चाप्या छाया फलं तनुभृतां शुभमादधाति ॥
जल की छाया स्निग्ध, बेठ, स्वच्छ, नीली और नेत्रों को प्रिय लगने वाली होती है। यह छाया सौभाग्य, अक्रूरता, सुख और अभ्युदय करने वाली, समस्त कार्यों को सिद्ध करने वाली तथा माता की तरह हित करने वाली होती है।
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