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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 87
हनुलोचनबाहुनासिकाः स्तनयोरन्तरमत्र पञ्चमम् । इति दीर्घमिदं तु पश्चकं न भवत्येव नृणामभूभृताम् ॥
दाँत, अंगुलियों के पर्व, केश, त्वचा, नख-ये पाँच अंग सूक्ष्म दुःखियों के नहीं होते अर्थात् जिनके ये अंग सूक्ष्म हों, वे सुखी होते हैं। हनु, नेत्र, बाहु, नासिका, दोनों स्तनों के मध्यभाग- ये पाँच अंग दीर्घ गायों के अतिशीत और किसी के होते हैं
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