नेत्रान्तपादकरताल्व धरोष्ठजिह्वा रक्ता नखाश्च खलु सप्त सुखावहानि । सूक्ष्माणि पञ्चदशनाङ्गुलिपर्वकेशाः सार्क त्वचा कररुहा न च दुःखितानाम् ॥
पुरुषों के नेत्रान्त भाग, पादतल, हाथ, तालु, अधर, जीभ, नख- ये सात अंग रक्त वर्ण हों तो सुख देने वाले होते हैं।
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