वक्षोऽथ कक्षा नखनासिवस्यं कृकाटिका चेति षडुनतानि । हस्वानि चत्वारि च लिङ्गपृष्ठं ग्रीवा च जते च हितप्रदानि ॥
पुरुषों के छाती, कक्षा, नख, नासिका, मुख, कुका- टिका (पेंटू) -ये ६ अंग ऊँचे तथा लिंग, पीठ, गरदन, जंघा-ये चार छोटे हों तो शुभ देने वाले होते हैं।
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