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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 83
त्रिषु विपुलो गम्भीरस्त्रिष्येय षडुन्नतश्चतुर्हस्वः । सप्तसु रक्तो राजा पञ्चसु दीर्घश्च सूक्ष्मश्च ॥
जिसके तीन अंग विस्तीर्ण, तीन गम्भीर, छः ऊँचे, चार छोटे, सात लाल और पाँच अंग लम्बे या सूक्ष्म हों, वह पुरुष राजा होता है।
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