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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 8
कोशनिगूढे भूपा दीपॅर्भग्नैश्च वित्तपरिहीनाः । ऋजुवृत्तशेफसो लघुशिरालशिश्नाश्च धनवन्तः ॥
जिन पुरुषों का लिङ्ग चर्मकोश के द्वारा पूर्ण रूप से सुरक्षित अर्थात् आच्छादित होता है, ये लोग राजा होते हैं एवं जिनका लिङ्ग लम्बायमान तथा स्पष्टतया टेढ़ा होता है, वे लोग धनहीन होते हैं। इसी प्रकार जिनका लिङ्ग वर्तुलाकार, छोटे आकार बाला या जिनके लिङ्ग की शिराये (अग्रभाग) स्वल्प हो, वे धनवान होते हैं।
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