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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 77
भ्रूलग्नाभिस्त्रिंशविंशतिक श्चैव वामवक्राभिः । क्षुद्राभिः स्वल्पायुर्यूनाभिश्चान्तरे कल्प्यम् ॥
यदि न्यून (एक या दो ) रेखा से युत ललाट हो तो भी बीस वर्ष से कम आयु होती है। बीच में अपनी बुद्धि से आयु की कल्पना करनी चाहिये। जैसे तीन रेखा वाले सौ वर्ष और चार रेखा वाले पश्चानबे वर्ष जीवित रहते हैं; अतः साढ़े तीन रेखा वाले साढ़े सत्तानवे वर्ष जीवित रहेंगे। इसी प्रकार अन्यत्र भी हिसाब लगा कर आयु का निश्चय करना चाहिये।
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