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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 73
हसितं शुभदमकम्पं सनिमीलितलोचनं तु पापस्य । दुष्टस्य हसितमसकृत् सोन्मादस्यासकृत् प्रान्ते ॥
विना काँपते हुये हँसना शुभ होता है तथा आँख मूँद कर हँसने वाला पापी, बार- बार हँसने वाला दुष्ट तथा हँसने के अन्त में पुनः पुनः हँसना उन्मादयुत पुरुष का लक्षण है।
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